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एक सवाल 

कितने खेल है यहाँ 
है यहाँ कितने खिलाडी 

क्या सब किसी का हिस्सा है
या कोई ऐसा भी है जो खेल के चुनाव से पिछड़ा है 

पिछड़े के लिए भी है जगह अगर मैदान में 
खुदा तू बतलादे उस कुर्सी के लिए मुझे करना है क्या 

क्या जीत है क्या हार है 
ये तय करना किसका काम है 

जो पता हो की हार है 
और कितने खेलों में भाग लेना 
अब उस शक़्स का काम है 

इस खेल की सीमा बतला 
उस खेल की गति तू बढ़ा 

आनंद को मुझे और है जीना 
पीड़ा को में देख न सका 

मैदान ऐ जंग जब ख़त्म हो 
तब उम्र की किस नाव में वो सवार है 

बीत गया क्या जीवन उसका 
या अब तक शुरू भी न हुआ 

खिलाड़ियों के पात्र भी अजीब है 
किन्ही को तो मृत्यु भी बलिदान है 

यह पहचान बता करेगा कौन 
की किस पक्ष ने पहना नक़ाब है 

क्या सच है , क्या झूठ है
क्या माया है , क्या लोभ है 

द्वन्द और दो राह के 
जाल में मैं फसता चला 

जाने खुदा से है , ज़िन्दगी से है 
सवाल मुझे ये माँ से है, या गुरु से है 

जो दे मुझे जवाब , 
या दिखलादे खेलने की सही रहा मुझे 
ये सवाल बस उसी से है 
ये सवाल बस उसी से है।   

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