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Showing posts from April, 2018
एक सवाल  कितने खेल है यहाँ  है यहाँ कितने खिलाडी  क्या सब किसी का हिस्सा है या कोई ऐसा भी है जो खेल के चुनाव से पिछड़ा है  पिछड़े के लिए भी है जगह अगर मैदान में  खुदा तू बतलादे उस कुर्सी के लिए मुझे करना है क्या  क्या जीत है क्या हार है  ये तय करना किसका काम है  जो पता हो की हार है  और कितने खेलों में भाग लेना  अब उस शक़्स का काम है  इस खेल की सीमा बतला  उस खेल की गति तू बढ़ा  आनंद को मुझे और है जीना  पीड़ा को में देख न सका  मैदान ऐ जंग जब ख़त्म हो  तब उम्र की किस नाव में वो सवार है  बीत गया क्या जीवन उसका  या अब तक शुरू भी न हुआ  खिलाड़ियों के पात्र भी अजीब है  किन्ही को तो मृत्यु भी बलिदान है  यह पहचान बता करेगा कौन  की किस पक्ष ने पहना नक़ाब है  क्या सच है , क्या झूठ है क्या माया है , क्या लोभ है  द्वन्द और दो राह के  जाल में मैं फसता चला  जाने खुदा से है , ज़िन्दगी से है  सवाल मुझे ये माँ से है, या गुरु से...
आज मैंने बस आज को देखा  सड़कें खाली है आज हवाओं को दौड़ने का मौका मिला है लोग घरों में बैठें हैं आज बादलों ने खूब बातें करी है कोनों में छुपके बच्चे पानी में छपाके  मार रहे हैं आज आसमान ने बूंदों की रिमझिम की है पेड़ों ने  धुप से छाओं दी थी आज पत्तियों ने , टहनियों ने , एक दूजे को देखा है तूने मुझ से , उसने उस से , बहु इश्क़ लड़ाया है आज गगन ने धरती को इश्क़ जताया है