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Showing posts from January, 2016
इस दुनिया के शोर में मेरे एहसासों को आवाज़ ना  मिली  दूर बेह्ते उस सागर की हलचल में एक लहर को  पहचान ना मिली  राहों पे पैरों के निशाँ को आज भी अपनी मंज़िल ना मिली  आसमान में चलती हवाएं  मेरे सपने उड़ा ले गई  बैठा था मैं भीड़ में की माज़ी  को सुकूं की याद ना मिली  इस भागती  ज़िन्दगी में कुछ पल चैन की  सांस न मिली ज़िन्दगी के इस सन्नाटे में बस तन्हाई को  आवाज़   मिली। ..