आज की तारिक भी हर साधारण तारिक की तरह चली गयी आज का दिन भी और दिनों जैसा ही था मगर आज कुछ ख़ास था कैसा ख़ास ये में कह नहीं सकती पर कुछ अलग तो था उस अलग के मायने क्या थे ये शायद बतला सकूँ आज लोगों के बीच होक भी तन्हाई थी आज तुमसे दूर होके भी तुम्हारी याद आई थी आज लोगों ने मुझपे रोज़ से कुछ अलग तंज़ कसे थे आज में सब कुछ सेहके भी तुम्हारे पास आई थी आज ही मेरे चेहरे पे रुआंसी आई थी। pragya jain