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Showing posts from May, 2015
कितने साल हो गए  मगर कुछ बदला नहीं  वही  आँखे , वही  चेहरा , वही  शिकन , वही  शिकवा  बदल गया तो सिर्फ अंदाज़ है  वजह भी वही  है  सज़ा  भी  वही  है  मायने  बदल गए  तुने  तब भी तन्हा  छोड़ा था  तुने  आज भी तन्हा  छोड़ा है  पहले नाराज़गी की आवाज़ कुछ और थी  अब कुछ और है  मगर नाराज़गी तो आज भी वही  है  या.....  या शायद कुछ बढ़ गयी  प्यार तो पहले भी नहीं था  और आज भी नहीं  है  शिकायत किस चीज़ की है तुझे  क्या कमी है मेरे फ़र्ज़ में  प्यार भी किया था तुझे  पर....  पर तूने ज़िन्दगी की राह पे अकेला छोड़ना मंज़ूर किया  तेरी ज़रूरतें , तेरी आदतें , तेरी नाराज़गी,  तेरी सोच , तेरा गुस्सा , और तेरा ही झूठा प्यार  मेरा क्या है ? में कौन हूँ ? में हूँ भी क्यों ? में हूँ भी कि  नहीं ?? तेरे लिए…  pragy...