ज़िन्दगी में रंग तो बहुत आये
मगर ज़िन्दगी रंगो से बेगानी हो गयी
ओढ़े तो थे तन पे रंग आज भी
मगर उन रंगों को देख मुस्कुराने की वजह खो गयी
खिलखिलाकर हंसा करती थी किसी ज़माने में मैं भी
मगर आज तो वजह होने पर भी
मुस्कुराने की वजह खो गयी . .
दूसरों के आंसूं पौंछा करती थी
अपने आँचल से मैं
आज मगर उस आँचल को लहराने की वजह भी खो गयी
लोगों का दुःख समेत जिस आँचल ने
आज उस आँचल को फैलाने की वजह भी
मगर ज़िन्दगी रंगो से बेगानी हो गयी
ओढ़े तो थे तन पे रंग आज भी
मगर उन रंगों को देख मुस्कुराने की वजह खो गयी
खिलखिलाकर हंसा करती थी किसी ज़माने में मैं भी
मगर आज तो वजह होने पर भी
मुस्कुराने की वजह खो गयी . .
दूसरों के आंसूं पौंछा करती थी
अपने आँचल से मैं
आज मगर उस आँचल को लहराने की वजह भी खो गयी
लोगों का दुःख समेत जिस आँचल ने
आज उस आँचल को फैलाने की वजह भी
खो गयी।
pragya jain
Nice .. Touching
ReplyDelete:)
ReplyDeleteBeautifully written, amazingly expressed.
ReplyDeleteThis one's my favourite :)
:):) thankuu so muchh :*
ReplyDeletePragya!!!!! This was absolutely amazing... Tu sachi bhaut hi zyada accha likhti hai....#Iadmireyou :)))
ReplyDeleteAmazing lines
ReplyDeleteAmazing
ReplyDelete:):) thank u so muchh keshav !!
ReplyDeletethanku @nikhil :)
nice one :)...really awesome pragya :)..publish krna start krde :) :)
ReplyDelete:P funny
ReplyDeleteThat was not funny at all..I seriously meant that :) :)
ReplyDelete