इस दुनिया के शोर मेंमेरे एहसासों को आवाज़ ना मिलीदूर बेह्ते उस सागर की हलचल मेंएक लहर को पहचान ना मिलीराहों पे पैरों के निशाँ कोआज भी अपनी मंज़िल ना मिलीआसमान में चलती हवाएंमेरे सपने उड़ा ले गईबैठा था मैं भीड़ मेंकी माज़ी को सुकूं की याद ना मिलीइस भागती ज़िन्दगी मेंकुछ पल चैन की सांस न मिलीज़िन्दगी के इस सन्नाटे मेंबस तन्हाई को आवाज़ मिली। ..
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