बंजारे मन ने आज फिर एक सपना देखा
औरों के शहर में फिर किसी को अपना देखा
पास गया. . . .
हाथ बढ़ाया . . . .
बात की . . . .
दिल मिलाया . . . .
मुस्काया भी कुछ वक़्त
. . . .
फिर तेज़ हवा चलने लगी
सपनों का वो आइना हिलने लगा
उसी हवा के साथ एक कंकर आया
और
वो आइना टूट गया
चलने को जब पैर उठाये
फिर वो सपनों का आइना
पैरों के तले बिछी चादर बन गया
दर्द हुआ . .
चोट लगी . .
आइना अब चुभने लगा
और रात बाद वाही ज़ख्म पैरों के निशां बन गए ,
ज़िन्दगी की कहानी के बेज़ुबान पन्ने बन गए
. . .
बस यूँही वो हमारे अपने और अपने बेगाने बन गए :):)
औरों के शहर में फिर किसी को अपना देखा
पास गया. . . .
हाथ बढ़ाया . . . .
बात की . . . .
दिल मिलाया . . . .
मुस्काया भी कुछ वक़्त
. . . .
फिर तेज़ हवा चलने लगी
सपनों का वो आइना हिलने लगा
उसी हवा के साथ एक कंकर आया
और
वो आइना टूट गया
चलने को जब पैर उठाये
फिर वो सपनों का आइना
पैरों के तले बिछी चादर बन गया
दर्द हुआ . .
चोट लगी . .
आइना अब चुभने लगा
और रात बाद वाही ज़ख्म पैरों के निशां बन गए ,
ज़िन्दगी की कहानी के बेज़ुबान पन्ने बन गए
. . .
बस यूँही वो हमारे अपने और अपने बेगाने बन गए :):)
PRAGYA JAIN
Amazing :)
ReplyDeletethank you :)
ReplyDeleteLife goes on...
ReplyDeleteyeah.. it does :):)
ReplyDeleteoptimistic :)
Amazing lines dude!
ReplyDeletethankuu so much :):)
ReplyDeleteNice composition
ReplyDelete:)
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