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आज ज़िन्दगी  मुझे बड़ी वीरान सी नज़र आई 
सूखे पेड़ के पत्तों में भी जान नज़र आई 
में दूर कड़ी बाहें फैलाऐ 
इंतज़ार करती रही ज़िन्दगी का 
वो जाने कब मुझसे टकराकर 
मुझे फिर कहीं और नज़र आई !!
Pragya jain

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