अँधेरी रात थी
एक आगाज़ था
हम चल रहे थे
जज़्बात बिखर रहे थे
मोती की तरह
फिर आंसू एक छलका
पलकों से गिर कर
आँचल में वो जा सिमटा
फिर आई एक नयी सुबह
और रास्ते हुए जवान
सूरज की किरणों ने फिर
दी ज़िन्दगी जीने की
एक नयी रहा !!
एक आगाज़ था
हम चल रहे थे
जज़्बात बिखर रहे थे
मोती की तरह
फिर आंसू एक छलका
पलकों से गिर कर
आँचल में वो जा सिमटा
फिर आई एक नयी सुबह
और रास्ते हुए जवान
सूरज की किरणों ने फिर
दी ज़िन्दगी जीने की
एक नयी रहा !!
pragya jain
Beautiful..!! :)
ReplyDelete:):) thanku
ReplyDeleteBeautiful!!!
ReplyDelete:)
ReplyDeleteNice poetry...
ReplyDeleteBeautifully framed
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