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कांटो पर चलकर 
जब फूलों का किआ इंतज़ार 
तब भी तुम न आये 

गर्मी में जलकर
जब बारिश के आने का किआ इंतज़ार 
तब भी तुम न आये 

अँधेरे से डरकर 
जब किया रौशनी के आने का इंतज़ार 
तब भी तुम न 

तो अब अपने टूट के बिखरने पर 
कैसे कर लूँ 
तुम्हारे आने का विश्वास 
pragya jain

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